आधी रात थी और तेज़ बारिश हो रही थी।इंदौर के बाहर बनी एक पुरानी हवेली की तरफ एक काली कार तेज़ी से बढ़ रही थी। हवेली पुरानी जरूर लगती थी, लेकिन साफ़-सुथरी और ठीक से रख रखाव की गई थी। ऐसा लग रहा था जैसे कोई वहां रहता न हो, फिर भी सब कुछ व्यवस्थित था। केवल मुख्य दरवाजे पर कुछ लाइटें जल रही थीं।कार एक बड़े लोहे के गेट के सामने रुकी।
दरवाज़ा खुला और एक महिला जो करीब 30 साल की लग रही थी, कार से बाहर आई। उसके चेहरे पर घबराहट और बेचैनी साफ दिख रही थी, जैसे वह किसी को खोज रही हो।
वह गेट से अंदर गई और बारिश में चलकर हवेली की ओर दौड़ी। उसकी चाल और चेहरे की झलक ये बताती थी कि वह कुछ बहुत ज़रूरी ढूंढ रही है।
आधी दूर तक दौड़कर वह रुकी और मुख्य दरवाजे के बजाय बाईं ओर बड़े बगीचे की ओर मुड़ गई। वहां केवल बगीचे की लाइटें जल रही थीं। वह बगीचे में बने पक्के रास्ते पर चलने लगी जो एक मंडप की ओर जाता था। कुछ पेड़ पार कर के वह मंडप के पास पहुंची।
मंडप में जाने के लिए उसने गेट खोल दिया और तेजी से बारिश से बचते हुए हवेली की तरफ बढ़ती रही। उसके चेहरे पर घबराहट और उसकी आंखों में बेचैनी साफ दिखाई दे रही थी।मंडप चार मजबूत खंभों पर टिका हुआ था, जिन पर सुंदर नक़्क़ाशी की गई थी। मंडप के अंदर दो गोल लकड़ी की बत्तियां थीं।
यह मंडप एक बड़े गोल तालाब के बीच में था और जमीन से एक छोटी लकड़ी की पुल से जुड़ा था।औरत की सांस तेज़ थी, पर उसकी आंखों में थोड़ी राहत थी, ऐसा लगता था जैसे उसे वह मिल गया हो जिसकी वह तलाश कर रही थी।मंडप के अंदर एक युवक था, जो उस महिला की तरफ पीठ करके खड़ा था।
उसकी उम्र करीब 23 साल की लग रही थी।उसने सफेद शर्ट और काली पैंट पहनी थी। ब्लेज़र जैकेट खंभे पर रखी लकड़ी की टेबल पर पड़ी थी। उसकी शर्ट की बाज़ुएं कुहनी तक मुड़ी हुई थीं और दोनों हाथ पैंट की जेब में थे।शर्ट के ऊपर के दो बटन खुले थे, जिससे उसकी अच्छी बनावट साफ़ दिख रही थी।
उसका चेहरा नुकीला और आकर्षक था। तेज़ नाक, गहरी काली आंखें, मजबूत जबड़ा, पतले होंठ। उसकी गोरी और चमकदार त्वचा बारिश की बूँदों से भीग गई थी, जो रोशनी में और चमक रही थी।उसका बदन मज़बूत था। काले बाल बारिश से भीगे और बिखरे हुए थे, जो उसकी आंखों की तरफ झुके हुए थे।
उसकी आंखें अंधेरे में कहीं खोई हुई थीं, जिनमें कोई एहसास नहीं था, न दर्द, न गुस्सा, न उम्मीद, बस खामोशी थी।बारिश में भीगी लड़की धीरे-धीरे उसके पास गई और कुछ कदम की दूरी पर रुक गई।
उसने आवाज़ लगाई, "विवान!"
विवान ने सुना लेकिन कोई जवाब नहीं दिया।आयरा का चेहरा गुस्से से तमतमाने लगा, पर खुद को संभालते हुए बोली, “तुम्हें पता है न कि सब लोग तुम्हारे लिए कितना परेशान हैं? हर कोई तुम्हें ढूंढ़ रहा है... चलो, वापस चलो।”
विवान ने बिना उसकी तरफ देखे ठंडी आवाज़ में कहा, “मुझे वापस नहीं जाना।”
यह सुनकर आयरा ने कहा, “तो फिर तुम क्या चाहते हो? ठीक है, रहने दो... मैं तुम्हारे नखरे सहने नहीं आई, बस मेरे सवालों का जवाब दो ताकि मैं सबको कुछ बता सकूं।”“शादी के आखिरी समय में तुम अचानक क्यों चले गए? मुझे बताओ।”
लेकिन फिर भी उसने कोई जवाब नहीं दिया। ऐसा लग रहा था जैसे उसे अपने किए पर कोई पछतावा नहीं था।आयरा का गुस्सा बढ़ गया।
वह बिना रुके, बिना सोचे सवालों की बौछार करने लगी जो उसके दिल में महीनों से थे:“तुमने मीरा के साथ ऐसा कैसे किया? तुम्हें नहीं पता कि तुमने उसे कितना दुख दिया? अगर तुम्हें उससे शादी नहीं करनी थी, तो झूठी उम्मीद क्यों दिलाई?”फिर कुछ पल रुककर चिल्लाते हुए बोली, “और पापा का क्या? तुमने उनका सिर कलम कर दिया। इतने कैसे बदल गए तुम, विवान?”आयरा गुस्से में चिल्ला रही थी, पर विवान बस खामोशी से खड़ा था, उसकी आंखें अंधेरे में खोई हुई थीं और उसका चेहरा खालीपन दिखा रहा था।
चारों ओर सिर्फ बारिश और हवा की आवाज़ थी।उसकी खामोशी से परेशान होकर आयरा ने एक बार फिर चिल्ला कर कहा, "विवान! मुझे जवाब चाहिए... आखिर तुम्हारे दिमाग में क्या चल रहा है? तुम ऐसी गैरजिम्मेदार हरकतें क्यों कर रहे हो? तुम ऐसे क्यों हो गए? बस एक बार तो बता दो, आखिर ऐसा किया क्यों?"
विवान धीरे-धीरे मुड़ा, एक कदम उसके करीब आया और उसकी आंखों में देखकर शांति से बोला, "क्योंकि मैं तुमसे प्यार करता हूँ, आयरा।"
उसकी आवाज बहुत शांत थी, लेकिन जब उसने उसका नाम लिया, तो उसकी आंखों में मोहब्बत और गर्माहट साफ दिख रही थी।वह हल्का महसूस करने लगा, मानो उसके दिल का कोई भारी बोझ उतर गया हो। वह बहुत संयमित और शांत था।
विवान की बात सुनकर आयरा की आंखें चौड़ी हो गईं। वह कांपते हुए थोड़ा पीछे हट गई और पास खड़े खंभे का सहारा लेकर खड़ी हो गई, जैसे उसने कोई डरावनी बात सुन ली हो।
कुछ देर बाद होश आने पर उसकी आंखों में गुस्सा जलने लगा।गुस्से में उसने तीखी नजरों से उसे देखते हुए कहा, "तुमने क्या कहा? तुम्हारा दिमाग ठीक है? पागल हो गए हो क्या? तुम ऐसा सोच कैसे सकते हो?"
उसके शब्द खत्म होने से पहले विवान तेजी से उसके पास आया, दोनों हाथों से उसे पकड़ लिया, पास के खंभे से ज़ोर से टिका दिया।
आयरा कुछ समझने से पहले ही उसने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।उसके शब्द बीच में ही रुक गए। उसकी आंखें फटी की फटी रह गईं। उसने दूर हटने की कोशिश की, लेकिन विवान की पकड़ बहुत मजबूत थी।
जितना वह छूटने की कोशिश करती, उसकी पकड़ और कसती जाती।कुछ देर बाद वह उसके होंठों से अलग हो गया, पर अब भी उसे खंभे से मजबूती से दबाकर रखा था। उसका चेहरा बहुत नजदीक था, इतना कि दोनों एक-दूसरे की साँसों की गर्माहट महसूस कर सकते थे।
उसकी आंखों में देखकर उसने पूछा, "क्यों? क्या मुझे तुम्हारे लिए पागल होने का हक़ नहीं?"आयरा कुछ कह पाती इससे पहले ही वह फिर झुक गया और दोबारा किस कर लिया। इस बार पहले से ज्यादा गहराई और जुनून के साथ, जैसे वह उसे पूरी तरह समेट लेना चाहता हो।
उसने उसके नीचे वाले होंठ को हल्के से काटा। उससे आयरा की पूरी देह में एक तेज़ करंट-सा दौड़ गया।वह अब भी खुद को उससे अलग करने की कोशिश कर रही थी, क्योंकि उसके सांस लेने में तकलीफ हो रही थी।
कुछ पल बाद वह रुका और उसकी आंखों में इस तरह देखा जैसे कोई जवाब पाने की कोशिश कर रहा हो।पर वहां सिर्फ हैरानी और गुस्सा था।आयरा की आंखें जल रही थीं। गुस्से से कांपते हुए उसने कहा, "तुम क्या समझते हो अपने आप को? ये क्या कर रहे हो तुम?"वह उसे ज़ोर से धकेलकर वहां से भागना चाहती थी, लेकिन उसकी पकड़ से निकल पाना नामुमकिन था।
जैसे ही उसने भागने की कोशिश की, विवान ने उसे फिर से अपनी ओर खींचा और पहले से भी ज्यादा कसकर बांहों में जकड़ लिया।
उसने अपने दाहिने हाथ से उसकी बांई कलाई पीछे कसकर पकड़ ली, और बाएं हाथ से उसकी गर्दन के पीछे रखकर उसका चेहरा थाम लिया ताकि वह हिल न सके।अपनी नजरें उसकी आंखों में गाढ़ते हुए गंभीर स्वर में बोला, "मैं अपनी पत्नी से प्यार करता हूँ।"
यह कहकर उसने मानो अपने अधिकार का दावा कर दिया।फिर उसने दोबारा किस किया, इस बार पूरी ताकत और जज़्बात के साथ। हर छुअन, हर सांस में एक ऐसा पागलपन और मोहब्बत थी जिसे वह सालों से दबाए रख रहा था।
Brother in law wali new story hai please follow kare chapter pasand hai to comment kare or haa suruwt aise hai but noval top level wali hai dark romance wali ❤️❤️
Author 🌹 Gitanshaa



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