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“ये… ये मेरे रूम में कौन घुसा है "

एक लड़की बेसुध-सी सड़क पर चल रही थी। उसकी बड़ी-बड़ी झील जैसी आँखों से लगातार आँसू बह रहे थे। रोते-रोते उसके गाल सूज चुके थे और पूरी तरह लाल हो गए थे। एक हाथ उसने अपने पर्स पर कसकर रखा था, दूसरा हाथ अपने पेट पर। उसके गर्भ में सात महीने का बच्चा पल रहा था।

वह होश में नहीं थी। पता नहीं किस सदमे ने उसे इस हाल में पहुँचा दिया था कि वह चलते-चलते सड़क के ठीक बीच आ गई। सड़क पर गाड़ियाँ तेज़ रफ्तार में दौड़ रही थीं। हॉर्न की आवाज़ें, ब्रेक की चीख—लेकिन उस लड़की के कानों तक कुछ भी साफ़ नहीं पहुँच रहा था।

“हट जाओ… अरे हटो!” किसी ने दूर से चिल्लाया, मगर वह जैसे सुन ही नहीं पाई। अचानक, एक ट्रक पूरी रफ्तार से उसकी तरफ़ बढ़ा—और अगले ही पल उसे ज़ोरदार टक्कर मारते हुए आगे निकल गया। सड़क के किनारे चल रहे लोग यह मंजर देखकर सन्न रह गए। कुछ पल के लिए सब जैसे जम से गए, फिर अफरा-तफरी मच गई।

“अरे! ये क्या हो गया?“मदद करो—मदद करो—एक प्रेग्नेंट लड़की को टक्कर लग गई—!” तेज़ धूप उसकी आँखों पर पड़ रही थी। उसे बस धुंधली-सी परछाइयाँ दिखाई दे रही थीं… और सामने, दूर खड़े दो ऐसे चेहरे, जिनसे उसे घिन आती थी।

पेट में उठते प्रेग्नेंसी के तेज़ दर्द के साथ उसका होश

लड़खड़ाने लगा। उसने थरथराते होंठों के साथ खुद से बुदबुदाया,“मेरा… बच्चा…”

फिर उसकी आँखें बंद हो गईं। ताज़ा खून उसके माथे से फिसलकर आँखों तक आ गया… और उसका पूरा संसार अँधेरे में डूब गया।

आख़िर ऐसा क्या हुआ था उस लड़की के साथ, और कौन थी वो लड़की? चलिए, कुछ देर पहले की ओर चलते हैं।

कुछ देर पहले

इंदौर शहर के CHL हॉस्पिटल में एक लड़की अस्पताल के कोरिडोर में कुर्सी पर बैठी थी। दिखने में वह बेहद खूबसूरत और मासूम-सी थी। घनी पलकें, गुलाबी मुलायम होंठ और बड़ी-बड़ी आँखें, जिनमें थकान साफ़ झलक रही थी। उसकी उम्र करीब उन्नीस या बीस साल रही होगी, और इतनी कम उम्र में वह सात महीने की गर्भवती थी।

वह आँखें बंद किए शायद डॉक्टर का इंतज़ार कर रही थी। तभी उसे कुछ धुंधला-सा महसूस हुआ,जैसे कोई सपना… या फिर कोई पुरानी याद, जो धीरे-धीरे उभरने लगी।

सपने में

एक फाइव-स्टार होटल,होटल के हॉल में ज़ोरों की पार्टी चल रही थी। कुछ लड़के-लड़कियाँ अपने दोस्तों के साथ डांस फ्लोर पर थिरक रहे थे, तो कुछ लोग बार काउंटर पर खड़े होकर ड्रिंक ले रहे थे। हॉल के दूसरी ओर, एक लड़की सोफे पर बैठी थी। उसने ब्लैक बॉडीकॉन ड्रेस पहन रखी थी। वह अपने फोन में किसी से चैट कर रही थी।

तभी डांस फ्लोर से एक लड़की नाचते हुए, हाथ में ड्रिंक का गिलास लिए, उसके पास आकर सोफे पर बैठ गई और बोली,“अनुष्का, व्हाट्स रॉन्ग विद यू?”

उस लड़की की बात सुनकर अनुष्का ने सिर उठाकर उसकी ओर देखा और क्यूट-सी स्माइल के साथ कान पकड़ते हुए बोली, “I’m really sorry, मिया। वो एक अर्जेंट कॉल था।”

अनुष्का की बात सुन मिया मुस्कुराते हुए बोली, “It’s okay, चल डांस करते हैं।”

अनुष्का ने ना में सिर हिलाते हुए कहा,“नहीं यार, मैं डांस नहीं करती। तू कर।”

मिया उसके पास सोफे पर बैठ गई और बोली, “मैडम, तुझे एक्ट्रेस बनना है और तू डांस करना पसंद नहीं करती?”

मिया की बात पर अनुष्का बस उसे देखती रह गई।

तभी मिया ने एक वेटर को इशारा करके दो सॉफ्ट ड्रिंक लाने का ऑर्डर दे दिया।

कुछ देर बाद—

अनुष्का और मिया सॉफ्ट ड्रिंक की सिप लेते हुए, डांस कर रहे हर कपल पर बातें कर रही थीं। अनुष्का ने ड्रिंक खत्म करते हुए कहा, “मुझे वॉशरूम जाना है।”

मिया ने उसे कमरे की चाबी देते हुए कहा,“सेकंड फ्लोर, रूम नंबर 6।”

अनुष्का चाबी लेकर पार्टी हॉल से बाहर निकल गई, और वहीं मिया डांस करने के लिए डांस फ्लोर की ओर चली गई।

अनुष्का लिफ्ट से निकलकर सेकंड फ्लोर पर आई, तभी उसे कुछ अजीब-सा महसूस हुआ। वो फ्लोर के कोरिडोर की दीवार से जाकर टिक गई। उसका चेहरा अचानक लाल पड़ गया और घबराहट की वजह से उसके माथे पर पसीना आने लगा।

वो गहरी-गहरी साँस लेते हुए खुद से बुदबुदाई, “ये… ये मुझे क्या हो रहा है?” उसकी आवाज़ हल्की-सी लड़खड़ा रही थी। वो खुद को संभालते हुए धीरे-धीरे आगे बढ़ने की कोशिश करने लगी, लेकिन उसके कदम साथ नहीं दे रहे थे। पेट में अजीब-सी मरोड़ थी, जैसे शरीर उसका कहना मान ही नहीं रहा हो।

अनुष्का दो-तीन कदम आगे बढ़ी और फिर रुक गई ,और खुद को शांत करते हुए बोली,“शांत… अनुष्का, शांत… बस वॉशरूम ही तो जाना है,”

वो खुद को समझाने की कोशिश करती है, लेकिन उसकी आँखें भारी-सी होने लगती हैं। वो कोरिडोर में कुछ कदम चलते हुए एक रूम के बाहर पहुँच जाती है। हाथ काँपते हुए वो चाबी से दरवाज़ा अनलॉक करने की कोशिश करती है,

लेकिन दरवाज़ा पहले से ही अनलॉक था। “अरे… खुला है?”

वो हल्की-सी हँसी हँसते हुए खुद से बोलती है, “लगता है आज सब कुछ अपने-आप ही हो रहा है।” अगले ही पल दरवाज़ा खुल जाता है और अनुष्का लड़खड़ाते हुए उस रूम के अंदर चली जाती है।

उसके कदमों में वही लड़खड़ाहट थी, उसकी आँखों में वही नशे-सी हालत… जैसे उसे खुद भी समझ नहीं आ रहा हो कि उसके साथ हो क्या रहा है।

वो जैसे ही रूम में दाख़िल हुई, उसका शरीर अजीब-सी गर्मी से भर गया। हाथ काँपते हुए उसने दरवाज़ा अंदर से लॉक किया। अचानक वॉशरूम से पानी के बहने की आवाज़ आई।

अनुष्का ने लड़खड़ाते क़दम संभाले, दीवार का सहारा लेते हुए बुदबुदाई,“ये… ये मेरे रूम में कौन घुसा है…?” उसकी ज़ुबान लड़खड़ा रही थी, आँखें भारी थीं, जैसे नशा सिर चढ़कर बोल रहा हो।

वो खुद से बातें करती हुई वॉशरूम की तरफ बढ़ी और धीरे से दरवाज़ा खोला। अंदर का नज़ारा देखते ही उसकी हिचकी बंध गई। उसकी नशीली आँखें चौड़ी हो गईं और वो वहीं जड़-सी खड़ी रह गई।

शावर के नीचे एक छह फ़ुट लंबा आदमी खड़ा था—सफेद शर्ट और काली पैंट में। गीली शर्ट शरीर से चिपकी हुई थी, जिससे उसकी बनावट साफ़ नज़र आ रही थी।

अनुष्का ने पलकें झपकाईं, जैसे यक़ीन करना चाह रही हो कि वो जो देख रही है, सच है या कोई वहम। काँपती आवाज़ में वो बोली,“स… सॉरी… ये… ये मेरा रूम है…”

उसने एक क़दम पीछे लिया, संतुलन खोते-खोते बची और दीवार पकड़ ली। उसकी साँसें तेज़ थीं, सिर घूम रहा था,“मुझे… मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा…”

New story likh rahi hun to please meri story read kar comment or review kare please 🥺

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Gitanshaa ❤️

Stepping into the world of new stories… I write from the heart, weaving emotions into every word. Dreams, love, and mysteries define my stories. ✨”